सहारनपुर/लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में महज 24 घंटे के भीतर हुए दो घटनाक्रमों ने सपा-कांग्रेस के रिश्तों के साथ सहारनपुर के राजनीतिक समीकरणों को भी चर्चा में ला दिया है। बुधवार को सहारनपुर की दिशा बैठक में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी विधायक आशु मलिक के बीच तीखी नोकझोंक हुई, वहीं गुरुवार को इमरान मसूद के दामाद सायान मसूद ने लखनऊ पहुंचकर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में सायान मसूद ने सपा की सदस्यता ली। सायान मसूद का राजनीतिक परिचय केवल इमरान मसूद के दामाद तक सीमित नहीं है। वह पश्चिमी यूपी की राजनीति के बड़े नाम रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद के पोते भी हैं। ऐसे में उनका सपा में जाना सहारनपुर की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
एक दिन पहले दिशा बैठक में भिड़े थे इमरान और आशु
सायान मसूद की सपा में एंट्री इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे ठीक एक दिन पहले सहारनपुर में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच तीखी बहस हुई थी। एक अधूरे नाले के मुद्दे पर शुरू हुई बातचीत देखते ही देखते नोकझोंक में बदल गई।
बैठक में दोनों नेताओं के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ और इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। सपा और कांग्रेस विपक्षी खेमे में साथ दिखाई देते रहे हैं, इसलिए दोनों दलों के नेताओं का सार्वजनिक बैठक में इस तरह आमने-सामने आना चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि बाद में इमरान मसूद ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे सपा और कांग्रेस के बीच किसी राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि बैठक में विकास के मुद्दे पर बातचीत के दौरान बहस हुई थी।
24 घंटे बाद परिवार से सपा में एंट्री
दिशा बैठक की नोकझोंक की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अगले ही दिन लखनऊ से सायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबर आ गई। इसी टाइमिंग ने इस घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।
सायान मसूद जिस परिवार से आते हैं, उसकी सहारनपुर और पश्चिमी यूपी की राजनीति में पुरानी पहचान रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे। इमरान मसूद भी वर्तमान में सहारनपुर से कांग्रेस सांसद हैं। ऐसे में परिवार की नई पीढ़ी के एक सदस्य का समाजवादी पार्टी के साथ जाना आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर नए राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकता है।
2027 से पहले क्या बदलेंगे सहारनपुर के समीकरण?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अभी से संगठन और क्षेत्रीय समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। पश्चिमी यूपी में सहारनपुर ऐसा जिला है, जहां मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलित, गुर्जर और अन्य सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डालते रहे हैं। कांग्रेस और सपा दोनों के लिए यह इलाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
ऐसे में एक तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक की सार्वजनिक नोकझोंक और दूसरी तरफ अगले ही दिन इमरान के दामाद सायान मसूद की अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में एंट्री ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
फिलहाल इन दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे राजनीतिक संबंध की पुष्टि नहीं है, लेकिन राजनीति में टाइमिंग भी संदेश देती है। अब सहारनपुर के सियासी गलियारों में सवाल यही है—यह महज संयोग है या 2027 से पहले किसी नए राजनीतिक समीकरण की आहट?