नई दिल्ली। बागपत से सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने लोकसभा में नियम 377 के तहत ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज भी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी है, जिसके कारण लोगों को समय पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
सांसद ने कहा कि विभिन्न मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों से प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी वर्षों से स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी इन प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दिया था।
डॉ. सांगवान ने सरकार से मांग की कि ऐसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की योग्यता, प्रशिक्षण और अनुभव का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाए तथा उनके लिए स्पष्ट नियामक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उनकी योग्यता के अनुरूप सेवाएं देने का अवसर प्रदान किया जाए।सांसद ने केंद्र सरकार से इस विषय पर एक विशेषज्ञ समिति गठित कर शीघ्र व्यापक नीति तैयार करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुदृढ़ होंगी और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।