Saturday, 01 August 2026 |  मेरठ, उत्तर प्रदेश
🔴 Breaking News
आधी रात नवविवाहित कपल का अपहरण, युवती से बेड टच और मोबाइल लूट… डायल-112 ने पीछा कर 3 बदमाश दबोचे पेपर लीक बिल लोकसभा से पास, राहुल गांधी के भाषण पर जमकर हंगामा, ‘इडियट’ और अंधभक्त शब्दों पर सत्ता पक्ष का विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो जारी कर दिया बड़ा संदेश, परीक्षा सुधारों के लिए बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स आधी रात नवविवाहित कपल का अपहरण, युवती से बेड टच और मोबाइल लूट… डायल-112 ने पीछा कर 3 बदमाश दबोचे पेपर लीक बिल लोकसभा से पास, राहुल गांधी के भाषण पर जमकर हंगामा, ‘इडियट’ और अंधभक्त शब्दों पर सत्ता पक्ष का विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो जारी कर दिया बड़ा संदेश, परीक्षा सुधारों के लिए बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स

भारत की सेना के साथ कदम से कदम मिलाने वाले श्वान भी होते हैं शहीद…

भारत की सेना के साथ कदम से कदम मिलाने वाले श्वान भी होते हैं शहीद…

नहीं रहा बागपत पुलिस का जांबाज इंट्रोफोर्ड: हत्या-चोरी के कई राज खोले, अंतिम सलामी में नम हुईं पुलिसकर्मियों की आंखें

बागपत।
हत्या और चोरी जैसी गंभीर घटनाओं की गुत्थी सुलझाने में बागपत पुलिस की मदद करने वाला प्रशिक्षित डॉग ‘इंट्रोफोर्ड’ अब नहीं रहा। लंबी बीमारी के बाद उसका निधन हो गया। पुलिस लाइन में अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने इस वफादार साथी को शोक सलामी देकर अंतिम विदाई दी।

इंट्रोफोर्ड पुलिस के लिए केवल एक प्रशिक्षित डॉग नहीं, बल्कि डॉग स्क्वाड का महत्वपूर्ण सदस्य था। घटनास्थल पर छोड़े गए सुरागों को सूंघकर संदिग्ध की दिशा बताना, अपराधी के आने-जाने का रास्ता तलाशना और जांच टीम को महत्वपूर्ण संकेत देना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल था। अपने सेवाकाल में उसने हत्या, चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच में अहम भूमिका निभाई।

इंट्रोफोर्ड की मौत के बाद एक बार फिर लोगों के मन में यह सवाल उठा है कि आखिर पुलिस और सुरक्षा बलों के ये डॉग कहां से आते हैं, इन्हें कौन प्रशिक्षित करता है, पुलिस को कैसे सौंपा जाता है और सेवा समाप्त होने के बाद इनका क्या होता है।

देश के सभी डॉग्स को अकेले सेना प्रशिक्षित नहीं करती

आम धारणा है कि पुलिस, सेना, CRPF, BSF, ITBP और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में तैनात सभी डॉग्स को भारतीय सेना ही प्रशिक्षित करती है। यह बात पूरी तरह सही नहीं है।

भारतीय सेना के पास अपना अलग सैन्य डॉग प्रशिक्षण ढांचा है। इसके अलावा CRPF, ITBP और कई राज्य पुलिस बलों के भी अपने डॉग ब्रीडिंग और ट्रेनिंग सेंटर हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस सेवा के डॉग्स के लिए अलग Police K9 Cell भी स्थापित किया है, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस की K9 इकाइयों के प्रशिक्षण, मानक, खरीद, हैंडलर चयन, कल्याण और रिटायरमेंट से संबंधित दिशा-निर्देश तैयार करता है।

इसलिए कोई पुलिस डॉग भारतीय सेना के सेंटर से प्रशिक्षित हो सकता है, किसी केंद्रीय बल के प्रशिक्षण केंद्र से आ सकता है या संबंधित राज्य पुलिस के अपने केंद्र में भी तैयार किया जा सकता है।

मेरठ का RVC सेंटर क्यों है खास?

मेरठ छावनी स्थित भारतीय सेना का Remount and Veterinary Corps Centre and College, जिसे सामान्य तौर पर RVC सेंटर कहा जाता है, देश के प्रमुख सैन्य पशु प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल है।

यहां भारतीय सेना के लिए डॉग्स के साथ-साथ घोड़ों और खच्चरों की देखभाल, प्रशिक्षण और चिकित्सा से संबंधित विशेषज्ञ तैयार किए जाते हैं। RVC ने भारत में युद्ध और सैन्य कार्यों के लिए डॉग्स को व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मेरठ में सेना के डॉग्स को अलग-अलग सैन्य जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाता है। इनमें शामिल हैं—

– विस्फोटक और बारूदी सुरंगों का पता लगाना
– संदिग्ध व्यक्ति या घुसपैठिए की तलाश
– जंगल, पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में खोज अभियान
– लापता जवानों और नागरिकों को तलाशना
– सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा
– ट्रैकिंग और गश्त
– आपदा के बाद मलबे में जीवित लोगों को खोजना
– संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध वस्तुओं की पहचान

RVC सेंटर में बड़ी संख्या में डॉग्स को सेना की अलग-अलग यूनिटों की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें सैन्य इकाइयों में भेजा जाता है।

CRPF का बेंगलुरु में अलग प्रशिक्षण केंद्र

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF का अपना Dog Breeding and Training School—DBTS बेंगलुरु के तरालू में है। यह पुलिस K9 के प्रजनन और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है।

इस संस्थान ने अगस्त 2011 में काम शुरू किया था। सितंबर 2011 में 15 पिल्लों और उनके हैंडलरों के पहले बैच का औपचारिक प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। यहां डॉग्स के साथ उनके हैंडलरों को भी एक टीम के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है।

CRPF के ये डॉग्स नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक खोज, वीआईपी सुरक्षा, जंगल अभियान और संवेदनशील प्रतिष्ठानों में तैनात किए जाते हैं।

इसी तरह ITBP, BSF और अन्य केंद्रीय बलों के भी अपने प्रशिक्षण और ब्रीडिंग संसाधन हैं। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बलों के प्रशिक्षण केंद्र दूसरे सरकारी संगठनों या राज्य पुलिस को प्रशिक्षित डॉग अथवा प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस को कैसे मिलते हैं प्रशिक्षित डॉग?

उत्तर प्रदेश पुलिस में किसी जिले को डॉग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सामान्यतः जिला स्तर पर सीधे बाजार से डॉग खरीदने जैसी नहीं होती। इसकी मांग पुलिस मुख्यालय और संबंधित शाखा के माध्यम से भेजी जाती है।

सबसे पहले यह देखा जाता है कि किस जिले या इकाई को किस प्रकार के प्रशिक्षित डॉग की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए—

– अपराधियों का पीछा करने के लिए ट्रैकर डॉग
– विस्फोटक खोजने के लिए एक्सप्लोसिव डिटेक्शन डॉग
– मादक पदार्थ तलाशने के लिए नारकोटिक्स डिटेक्शन डॉग
– सुरक्षा और गश्त के लिए पेट्रोल डॉग
– शव या मानव अवशेष खोजने के लिए विशेष प्रशिक्षित डॉग

मांग स्वीकृत होने के बाद पुलिस मुख्यालय उपलब्ध सरकारी प्रशिक्षण केंद्र से डॉग खरीदने या प्रशिक्षण कराने की प्रक्रिया शुरू करता है। उत्तर प्रदेश पुलिस पहले ITBP की सुविधाओं से भी डॉग प्राप्त करती रही है। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस के अपने डॉग प्रशिक्षण केंद्र की योजना से संबंधित जानकारी सामने आई थी।

डॉग के साथ एक या दो पुलिसकर्मियों को उसका हैंडलर बनाया जाता है। कई मामलों में डॉग और हैंडलर को एक साथ प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है, ताकि दोनों के बीच तालमेल बन सके।

डॉग के चयन में क्या देखा जाता है?

हर सुंदर, मजबूत या महंगी नस्ल का डॉग पुलिस या सेना के काम के योग्य नहीं होता। प्रशिक्षण से पहले उसकी शारीरिक और मानसिक क्षमता की जांच की जाती है।

चयन के दौरान आमतौर पर देखा जाता है कि—

– डॉग पूरी तरह स्वस्थ हो
– उसके सूंघने और सुनने की क्षमता अच्छी हो
– वह तेज आवाज से अत्यधिक भयभीत न होता हो
– उसमें वस्तु खोजने और पीछा करने की स्वाभाविक रुचि हो
– वह आदेश समझने और दोहराने में सक्षम हो
– उसका स्वभाव काम के अनुकूल हो
– उसके कूल्हे, पैर, आंखें, कान और दांत स्वस्थ हों
– वह लंबे समय तक सक्रिय रह सके
– उसमें अपने हैंडलर के साथ जुड़ने की क्षमता हो

डॉग की नस्ल से अधिक उसका स्वभाव, स्वास्थ्य, उत्साह और काम करने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।

किन नस्लों को किया जाता है शामिल?

सेना और पुलिस में काम की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग नस्लों को चुना जाता है। इनमें सामान्यतः—

लैब्राडोर: शांत स्वभाव और बेहतरीन सूंघने की क्षमता के कारण विस्फोटक, मादक पदार्थ और अन्य वस्तुएं खोजने में उपयोगी।

जर्मन शेफर्ड: ट्रैकिंग, गश्त, सुरक्षा, संदिग्ध की तलाश और कई तरह के पुलिस कार्यों में सक्षम।

बेल्जियन मेलिनोइस: बेहद सक्रिय, तेज, चुस्त और कठिन अभियान में काम करने वाला डॉग। इसका उपयोग सुरक्षा तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी किया जाता है।

डच शेफर्ड: सहनशीलता, फुर्ती और कठिन परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के कारण उपयोगी।

कॉकर स्पैनियल: आकार में छोटा होने के कारण वाहनों, कमरों, सामान और तंग स्थानों में खोज के लिए उपयोगी।

मुधोल हाउंड जैसी भारतीय नस्लें: भारतीय वातावरण में अनुकूलन और सहनशीलता के कारण सुरक्षा बलों ने स्वदेशी नस्लों को भी अपनी K9 इकाइयों में शामिल करना शुरू किया है।

नस्ल का चयन उस काम के अनुसार किया जाता है जिसके लिए डॉग को तैयार करना है।

पिल्ले से जवान बनने तक कैसे होती है ट्रेनिंग?

प्रशिक्षण की शुरुआत पिल्ले के स्वास्थ्य, व्यवहार और सामाजिक विकास से होती है। शुरुआती महीनों में उसे अलग-अलग लोगों, स्थानों, आवाजों, वाहनों, सतहों और परिस्थितियों से परिचित कराया जाता है।