Thursday, 17 September 2026 |  मेरठ, उत्तर प्रदेश
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प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, जानिए कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री

प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, जानिए कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री

New Delhi. केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रहलाद जोशी को यह नई जिम्मेदारी दी गई। वे अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे।

कौन हैं प्रहलाद जोशी?
प्रहलाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर (तत्कालीन बीजापुर) में हुआ था। उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली से स्नातक (बी.ए.) की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे।

लगातार जीतने वाले नेताओं में शुमार
प्रहलाद जोशी वर्ष 2004 में पहली बार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने लगातार 2009, 2014, 2019, 2024 और 2026 में भी जीत दर्ज की। वे भाजपा के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी के संगठनात्मक नेताओं में उनकी मजबूत पहचान है।

केंद्र सरकार में निभाई कई अहम जिम्मेदारियां
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में प्रहलाद जोशी को संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। वर्ष 2024 में तीसरी मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सौंपा गया। अब इन्हीं जिम्मेदारियों के साथ उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन
प्रहलाद जोशी की पत्नी का नाम ज्योति जोशी है। उनकी तीन बेटियां हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत और क्रिकेट में उनकी विशेष रुचि बताई जाती है।

शिक्षा मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौतियां
प्रहलाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं, जब राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, उच्च शिक्षा और छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में उनकी नई भूमिका पर पूरे देश की नजर रहेगी।