महोबा के चर्चित सर्राफ हत्याकांड के खुलासे पर मिला था सिल्वर मेडल और DGP Commendation, अब उपलब्धियों में जुड़ा गोल्ड मेडल
मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी तेजतर्रार कार्यशैली और शानदार पुलिसिंग से अलग पहचान बनाने वाली 2015 बैच की IPS अधिकारी अपर्णा गुप्ता ने मेरठ का मान बढ़ाया है। मेरठ की बेटी अपर्णा गुप्ता को इस बार उनकी उत्कृष्ट और सराहनीय पुलिस सेवाओं के लिए गोल्ड मेडल मिला है। इससे पहले भी वह अपनी बेहतरीन पुलिसिंग के लिए सिल्वर मेडल और DGP Commendation हासिल कर चुकी हैं।
अपर्णा गुप्ता मूल रूप से मेरठ की रहने वाली हैं। उनकी बड़ी बहन जर्नलिस्ट अर्चिता गुप्ता मेरठ की कोरल स्प्रिंग्स कॉलोनी में रहती हैं। पुलिस सेवा में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपर्णा गुप्ता ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और गंभीर मामलों के तेजी से खुलासे ने उन्हें विभाग में अलग पहचान दिलाई है।
महोबा में दिखाई थी शानदार पुलिसिंग, मिला था सिल्वर मेडल
अपर्णा गुप्ता की पुलिसिंग का एक बड़ा उदाहरण महोबा में उनके एसपी रहते हुए सामने आया था। पनवाड़ी इलाके में एक सर्राफा व्यापारी की दिनदहाड़े लूट के बाद हत्या कर दी गई थी। सनसनीखेज वारदात से व्यापारियों में आक्रोश था और पुलिस के सामने हत्यारों को पकड़ने के साथ लूटा गया माल बरामद करने की बड़ी चुनौती थी।
तत्कालीन एसपी अपर्णा गुप्ता ने खुद पूरे ऑपरेशन की निगरानी की। पुलिस की अलग-अलग टीमों को वारदात के खुलासे में लगाया गया और तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपियों को दबोच लिया गया। पुलिस ने करीब 92 लाख रुपये नकद और लगभग 630 ग्राम सोना भी बरामद किया था।
इस बड़ी वारदात का बेहद कम समय में खुलासा करने और शानदार पुलिसिंग के लिए अपर्णा गुप्ता को सिल्वर मेडल और DGP Commendation से सम्मानित किया गया था। अब उन्हें मिला गोल्ड मेडल महोबा की उस घटना के लिए नहीं, बल्कि उनकी पुलिस सेवा में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्यों के लिए मिला नया सम्मान है।
UPSC परीक्षा से पांच दिन पहले मां का निधन, नहीं छोड़ा लक्ष्य
अपर्णा गुप्ता का सफर सिर्फ उपलब्धियों का ही नहीं, बल्कि संघर्ष और मजबूत इरादों की कहानी भी है। वर्ष 2012 में उनकी UPSC मुख्य परीक्षा से महज पांच दिन पहले उनकी मां का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटने के बावजूद अपर्णा ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।
बीटेक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और आखिरकार सफलता हासिल कर 2015 बैच की IPS अधिकारी बनीं।
महोबा की पुलिस अधीक्षक के रूप में अच्छी छाप छोड़ी। वर्तमान में वह पुलिस मुख्यालय में सेवाएं दे रही हैं।