Thursday, 17 September 2026 |  मेरठ, उत्तर प्रदेश
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4 महीने में 22 को फांसी… कौन हैं UP के जज रवि कुमार दिवाकर, अब तक 35 को सुना चुके मौत की सजा…

4 महीने में 22 को फांसी… कौन हैं UP के जज रवि कुमार दिवाकर, अब तक 35 को सुना चुके मौत की सजा…

Muzaffarnagar. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक जज अपने ताबड़तोड़ और बेहद सख्त फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। नाम है अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर। पिछले चार महीनों में उनकी अदालत ने 10 अलग-अलग मामलों में 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।

आंकड़ा यहीं नहीं रुकता। इससे पहले बरेली में तैनाती के दौरान भी जज रवि कुमार दिवाकर 13 दोषियों को मृत्युदंड सुना चुके थे। यानी अलग-अलग अदालतों में उनके फैसलों में अब तक 35 दोषियों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।

6 अप्रैल से शुरू हुआ फैसलों का सिलसिला

मुजफ्फरनगर में मृत्युदंड का पहला बड़ा फैसला 6 अप्रैल 2026 को आया। अधिवक्ता समीर सैफी के अपहरण और हत्या के मामले में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। समीर की 2019 में हत्या की गई थी और शव बाद में भोपा क्षेत्र के सिकरी गांव के जंगल से बरामद हुआ था।

इसके बाद फैसलों का सिलसिला लगातार चलता रहा। 28 अप्रैल को चार, 30 मई को एक, 20 जून को दो, 2 जुलाई को एक, 6 जुलाई को दो और 17 जुलाई को चार दोषियों को मृत्युदंड दिया गया। अगस्त में भी सिलसिला जारी रहा—12 अगस्त को एक और 13 अगस्त को चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इस तरह मुजफ्फरनगर में संख्या 22 तक पहुंच गई।

इन मामलों में 2020 में ड्यूटी के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या का मामला भी शामिल है। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए दोषी को मृत्युदंड दिया।

एक अन्य पुराने मामले में 2011 में लूट के दौरान किसान की हत्या के चार दोषियों को भी मौत की सजा सुनाई गई। अदालत ने टिप्पणी की कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।

बरेली में भी 13 को सुना चुके मौत की सजा

मुजफ्फरनगर आने से पहले रवि कुमार दिवाकर बरेली में तैनात रहे। वहां उनके द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजाओं की संख्या 13 बताई गई है। इनमें 2014 के ट्रिपल मर्डर और डकैती मामले में छैमार हसन गैंग के आठ सदस्यों को मृत्युदंड दिया जाना भी शामिल है।

इस हिसाब से बरेली और मुजफ्फरनगर के फैसले मिलाकर उनके द्वारा मृत्युदंड पाने वाले दोषियों की संख्या 35 हो चुकी है।

ज्ञानवापी केस से देशभर में आया था नाम

रवि कुमार दिवाकर का नाम पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 2022 के ज्ञानवापी प्रकरण के दौरान चर्चा में आया था। वाराणसी में सिविल जज सीनियर डिवीजन रहते हुए उन्होंने ज्ञानवापी परिसर का कोर्ट की निगरानी में वीडियोग्राफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था।

उस दौरान उन्हें धमकी भरी चिट्ठी मिलने का मामला भी सामने आया था और उनकी सुरक्षा की समीक्षा की गई। बाद में बरेली में तैनाती के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नंबरों से संदिग्ध कॉल आने की शिकायत भी पुलिस से की थी।

आजमगढ़ से चित्रकूट तक रही तैनाती

उपलब्ध जानकारी के अनुसार रवि कुमार दिवाकर आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट में तैनात रह चुके हैं। इसके बाद 29 नवंबर 2025 को उन्होंने मुजफ्फरनगर में कार्यभार संभाला। फिलहाल वे यहां फास्ट ट्रैक कोर्ट से जुड़े हैं।

मौत की सजा पर अंतिम मुहर हाईकोर्ट की

हालांकि सेशन कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने का अर्थ तत्काल फांसी नहीं होता। कानून के तहत ऐसी सजा हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना लागू नहीं की जा सकती। इसलिए इन मामलों में मृत्युदंड की पुष्टि की न्यायिक प्रक्रिया आगे उच्च न्यायालय में होती है।