वेस्ट यूपी से लखनऊ, शिमला और अमृतसर तक जहां रहे, पत्रकारिता में छोड़ी अपनी अलग छाप
लखनऊ/मेरठ। हाथ में कलम रही तो खबरों के जरिए आम आदमी की आवाज उठाई और अब संवैधानिक जिम्मेदारी मिली तो सूचना के अधिकार के जरिए उसी आम आदमी के हक से जुड़े मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। यह सफर है पत्रकारिता में हमारे गुरु वरिष्ठ पत्रकार से उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त बने राजेंद्र सिंह का। शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात हुई तो एक तस्वीर में उनके व्यक्तित्व के तीन पहलू—कलम, कर्म और गायत्री साधना—एक साथ नजर आए।
मुख्यमंत्री आवास पर शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त आरके विश्वकर्मा और राज्य सूचना आयुक्तों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। इस दौरान जन सूचना से जुड़े मुकदमों के निस्तारण के साथ देश के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इसी मुलाकात के दौरान राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गायत्री महाविज्ञान पुस्तक भेंट की।
यह पुस्तक भेंट अपने आप में खास रही। राजेंद्र सिंह का गायत्री साधना से गहरा और पुराना जुड़ाव है। वह गायत्री के गहन उपासक हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को गायत्री महाविज्ञान भेंट करना उनके व्यक्तित्व के उस आध्यात्मिक पक्ष की भी झलक देता है, जो पत्रकारिता और सार्वजनिक जिम्मेदारी के साथ वर्षों से उनके जीवन का हिस्सा रहा है।
वेस्ट यूपी से शिमला-अमृतसर तक, जहां रहे अपनी छाप छोड़ी
राजेंद्र सिंह की पत्रकारिता का सफर किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहा। वेस्ट यूपी की पत्रकारिता में उनकी मजबूत पहचान रही, वहीं लखनऊ, शिमला और अमृतसर जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों पर न्यूज एडिटर की जिम्मेदारी निभाते हुए भी उन्होंने अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बनाई।
राजेंद्र सिंह जब अमर उजाला, मेरठ के संपादक थे, उसी दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया। मेरठ में रहते हुए उन्होंने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक सरोकारों और बदलते सियासी परिदृश्य को बेहद करीब से देखा और संपादकीय नेतृत्व दिया।
पत्रकारिता की लंबी पारी में शहर और जिम्मेदारियां बदलती रहीं, लेकिन उनकी पहचान नहीं बदली। ईमानदारी, सादगी, सौम्य व्यवहार और खबर के प्रति गंभीरता। बड़ी संपादकीय जिम्मेदारियों पर रहते हुए भी सहजता उनके व्यक्तित्व की खासियत बनी रही। यही वजह है कि वेस्ट यूपी हो, लखनऊ हो, शिमला या अमृतसर, जहां भी उन्होंने काम किया, वहां पत्रकारिता में अपनी अलग छाप छोड़कर आगे बढ़े।
पद से नहीं, काम और व्यक्तित्व से बनाई पहचान
पत्रकारिता की दुनिया में राजेंद्र सिंह उन वरिष्ठ पत्रकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने शोर से ज्यादा अपने काम को बोलने दिया। खबर की समझ, संपादकीय दृष्टि और सहयोगियों के साथ सहज व्यवहार ने उन्हें अलग पहचान दी। बदलती पत्रकारिता के दौर में भी उन्होंने अपनी मूल कार्यशैली और सिद्धांतों को प्राथमिकता दी।
आज जब पत्रकारिता तेजी से बदल रही है, तब सादगी और सिद्धांतों के साथ लंबी पारी खेलने वाले राजेंद्र सिंह जैसे वरिष्ठ पत्रकार उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने पत्रकारिता की विश्वसनीयता को वर्षों तक मजबूती दी है।
कलम से सूचना आयोग तक, केंद्र में रहा आम आदमी
उनके सफर की सबसे खास बात यह है कि पत्रकारिता और राज्य सूचना आयोग भले दो अलग-अलग जिम्मेदारियां हों, लेकिन दोनों के केंद्र में सूचना और आम नागरिक हैं।
पत्रकार के रूप में राजेंद्र सिंह ने आम लोगों के मुद्दों और व्यवस्था की कार्यप्रणाली को बेहद करीब से देखा। पत्रकारिता में जब तक रहे लोकप्रिय सर के रूप में रहे। उन्होंने कभी अपने जूनियर को ये अहसास नहीं दिलाया कि वो बॉस हैं, हमेशा सबको साथ लेकर चले, सबको आगे बढ़ाया। आज की दुनिया में ऐसे सीनियर पत्रकार और संपादक खत्म हो गए हैं। आज सर राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों के निस्तारण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कभी कलम के जरिए सूचना आम आदमी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, आज उसी आम आदमी के सूचना पाने के अधिकार से जुड़े मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।